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पत्थर नहीं हूं मैं

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भावनाओं, रिश्तों और सामाजिक सरोकारों का एक अनूठा दस्तावेज – ‘पत्थर नहीं हूं मैं’

देश की दूसरी सबसे कम उम्र की प्रकाशित कवयित्री खुशी मिश्रा ‘कसक’ का यह पहला कविता संग्रह ‘पत्थर नहीं हूं मैं’ समकालीन हिंदी साहित्य में एक ताज़ा और बेहद संवेदनशील दस्तक है। एक गैर-साहित्यिक परिवार में जन्मी खुशी मिश्रा ने अपने इस पदार्पण संग्रह में उन अनुभूतियों को शब्दों में पिरोया है, जो एक युवा मन अपने समाज, परिवेश और रिश्तों से ग्रहण करता है।

जैसा कि पुस्तक के शीर्षक से ही झलकता है, ये कविताएँ संवेदनाओं से जीवंत हैं। इसमें जीवन की उन तमाम तकलीफों, संघर्षों और आघातों का बेहद संकेतात्मक व मार्मिक काव्य वर्णन है, जिसका सामना एक युवा कवयित्री को अपने जीवन में करना पड़ा। लेकिन यह संग्रह केवल दुखों का नहीं है; इन कविताओं के बीच पाठकों को छिटफुट खुशियों के अनमोल पल, जीवन के प्रति एक सकारात्मक नज़रिया और मानवीय रिश्तों में अटूट आस्था के बेहद सुंदर और दुर्लभ चित्र भी बिखरे हुए मिलते हैं।

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भावनाओं, रिश्तों और सामाजिक सरोकारों का एक अनूठा दस्तावेज – ‘पत्थर नहीं हूं मैं’

देश की दूसरी सबसे कम उम्र की प्रकाशित कवयित्री खुशी मिश्रा ‘कसक’ का यह पहला कविता संग्रह ‘पत्थर नहीं हूं मैं’ समकालीन हिंदी साहित्य में एक ताज़ा और बेहद संवेदनशील दस्तक है। एक गैर-साहित्यिक परिवार में जन्मी खुशी मिश्रा ने अपने इस पदार्पण संग्रह में उन अनुभूतियों को शब्दों में पिरोया है, जो एक युवा मन अपने समाज, परिवेश और रिश्तों से ग्रहण करता है।

जैसा कि पुस्तक के शीर्षक से ही झलकता है, ये कविताएँ संवेदनाओं से जीवंत हैं। इसमें जीवन की उन तमाम तकलीफों, संघर्षों और आघातों का बेहद संकेतात्मक व मार्मिक काव्य वर्णन है, जिसका सामना एक युवा कवयित्री को अपने जीवन में करना पड़ा। लेकिन यह संग्रह केवल दुखों का नहीं है; इन कविताओं के बीच पाठकों को छिटफुट खुशियों के अनमोल पल, जीवन के प्रति एक सकारात्मक नज़रिया और मानवीय रिश्तों में अटूट आस्था के बेहद सुंदर और दुर्लभ चित्र भी बिखरे हुए मिलते हैं।

संपादकीय एवं प्रकाशन गौरव: इस महत्वपूर्ण कृति का संपादन और प्रकाशन काशी (वाराणसी) के प्रख्यात साहित्यकार, संपादक और वरिष्ठ प्रकाशक पं० छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ ने किया है। देश और दुनिया में अपनी अनूठी प्रकाशन शैली और भव्य पुस्तक लोकार्पण आयोजनों के लिए तेजी से ख्याति अर्जित करने वाली प्रतिष्ठित संस्था ‘स्याही प्रकाशन’ द्वारा इसे बेहद आकर्षक रूप में प्रकाशित किया गया है।

साहित्यिक जगत में कदम रखते ही काशी के विद्वानों और पाठकों द्वारा इस पुस्तक और कवयित्री ‘कसक’ का आत्मीय स्वागत किया जा रहा है। यदि आप समकालीन हिंदी कविता, नए दौर के कवियों की सोच और जीवन के विविध आयामों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी लाइब्रेरी का हिस्सा ज़रूर होनी चाहिए।

मुख्य विशेषताएं (KPatthar Nahi Hoon Mainey Features / Bullet Points):

  • नवोदित प्रतिभा: देश की दूसरी सबसे कम उम्र की प्रकाशित कवयित्री खुशी मिश्रा ‘कसक’ का अत्यंत प्रशंसित और बहुचर्चित पहला कविता संग्रह।

  • गहन संवेदनाएं: जीवन की तकलीफों, सामाजिक ताने-बाने और मानवीय रिश्तों के अनुभवों को दर्शाती बेहद मार्मिक कविताएँ।

  • सकारात्मक दृष्टिकोण: संघर्षों के बीच भी रिश्तों में अटूट आस्था और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को रेखांकित करती अनूठी रचनाएँ।

  • कुशल संपादन: काशी के समर्थ और सुप्रसिद्ध साहित्यकार पं० छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ द्वारा उच्च स्तरीय संपादन।

  • गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन: साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके ‘स्याही प्रकाशन’, वाराणसी द्वारा खूबसूरती से मुद्रित और प्रकाशित।

  • साहित्य प्रेमियों के लिए उपहार: हिंदी गीतों व आधुनिक कविताओं में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक संग्रहणीय पुस्तक।

Weight 100 g
Dimensions 12 × 01 × 19 cm

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