maraye ki hardi

‘मड़ये की हरदी’ : पुस्तक समीक्षा | स्याही प्रकाशन

स्याही प्रकाशन । समालोचना टीम। किसी भी समाज को उसकी लोक परंपराएँ, जीवन-मूल्य और संस्कृति ही जीवंत बनाए रखती हैं। सामाजिक चेतना को जाग्रत करने और उसे एक सुदृढ़ आधार देने में लोक परंपराओं की भूमिका सदैव से सर्वोपरि रही है। किसी लोक परंपरा का वास्तविक खांटीपन उसकी अपनी लोकभाषा, बोली और देशज शब्दावली में […]

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