प्रिय आत्मीय रचनाकार साथियों और सुधी पाठकों,
शब्द केवल कागज़ पर बिखरी हुई स्याही नहीं होते; ये किसी रचनाकार के हृदय का स्पंदन, उसके आंसू, उसकी खुशियाँ और उसकी आत्मा की आवाज़ होते हैं। जब एक लेखक रातों की नींद भुलाकर, अपने आस-पास के समाज की पीड़ा, अपनी माटी की सोंधी महक और जीवन के यथार्थ को पन्नों पर उकेरता है, तो वह अपना एक हिस्सा उन रचनाओं में हमेशा के लिए छोड़ देता है।
‘स्याही प्रकाशन’ की नींव किसी व्यावसायिक महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि कलम की इसी तपस्या और भावना के सम्मान में रखी गई है। हम बहुत गहराई से यह महसूस करते हैं कि जब कोई पांडुलिपि हमारे पास आती है, तो वह महज़ कागज़ों का पुलिंदा नहीं होती; उसमें एक लेखक के अनकहे सपने, उसकी उमीदें और वर्षों का मौन संघर्ष छिपा होता है।
यह देखकर हृदय सचमुच बहुत व्यथित होता है कि कई बार बेहतरीन और सशक्त रचनाएँ केवल संसाधनों और सही मार्गदर्शन के अभाव में दम तोड़ देती हैं। एक प्रतिभावान कलम पैसों के अभाव में खामोश रह जाए, यह साहित्य के साथ सबसे बड़ा अन्याय है। रचनाकारों की इसी पीड़ा को महसूस करते हुए हमने ‘निःशुल्क पुस्तक प्रकाशन योजना’ जैसी पहल की है, ताकि हर उस सच्ची आवाज़ को दुनिया तक पहुँचाया जा सके जो समाज का दर्पण है।
वर्ष 2027 में प्रस्तावित हमारा वृहद पुस्तक चयन और लोकार्पण समारोह इसी भावुक संकल्प का एक हिस्सा है—जहाँ हम साहित्य के सच्चे साधकों को वह सम्मान और मंच दिलाना चाहते हैं, जिसके वे असल में हकदार हैं।
आइए, भावनाओं और शब्दों की इस पवित्र यात्रा में हमसफ़र बनें। आपकी कहानियाँ, आपकी कविताएँ और आपके विचार दुनिया के सामने आने के लिए बेताब हैं, और ‘स्याही प्रकाशन’ उन्हें पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ एक सुंदर आकार देने के लिए संकल्पित है।
भावपूर्ण शुभकामनाओं सहित,
पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’
स्याही प्रकाशन
