पुस्तक : राममय
लेखिका: पूजाश्री
प्रकाशक: स्याही प्रकाशन
“राममय – रामत्व में रची-बसी एक भावपूर्ण काव्य यात्रा” मुंबई की संवेदनशील एवं प्रतिभाशाली कवयित्री पूजाश्री द्वारा रचित काव्य-संग्रह राममय भारतीय आध्यात्मिकता और भक्ति-काव्य परंपरा को आधुनिक संवेदना से जोड़ने वाला एक अत्यंत मनोहारी प्रयास है। यह पुस्तक केवल राम को समर्पित नहीं, बल्कि रामत्व की उस व्यापक छाया को समर्पित है जो प्रेम, त्याग, मर्यादा और करुणा की आधारशिला है। इस पुस्तक का प्रकाशन देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थान स्याही प्रकाशन ने किया है, जो वर्तमान समय में हिंदी साहित्य को सशक्त मंच प्रदान करने के लिए जाना जाता है। स्याही प्रकाशन की गुणवत्ता और चयन दृष्टि इस पुस्तक के हर पृष्ठ में अनुभव की जा सकती है। भाषा और शिल्प पूजाश्री की भाषा सरल, प्रभावशाली और भाव-प्रवण है। उन्होंने अपनी कविताओं में क्लिष्टता से परहेज़ करते हुए ऐसी शैली अपनाई है जो आम पाठक के मन को सहज ही छू लेती है। उनके छंदों में लोकभाषा की मिठास और संस्कृतनिष्ठ शब्दों की गहराई का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है। प्रत्येक कविता एक अलग दृश्य रचती है—कहीं वह बाल राम की निश्छलता है, तो कहीं वनगमन की पीड़ा; कहीं जनकपुरी की सखियों की राम-भावना है, तो कहीं भरत की तपस्या का मौन करुण राग। मुख्य विषयवस्तु राममय का प्रमुख तत्व “राम” एक व्यक्तित्व नहीं, एक तत्व हैं—इस भाव को पूरे संग्रह में निरंतर प्रकट किया गया है। लेखिका ने राम को केवल एक राजा या अवतार न मानकर, एक आदर्श मानवीय चेतना के रूप में चित्रित किया है। इस पुस्तक की कविताएं तुलसीदास, कबीर और आधुनिक भक्ति-काव्य परंपरा की एक नई कड़ी की तरह प्रतीत होती हैं। कई कविताओं में सीता, हनुमान, शबरी, लक्ष्मण, उर्मिला आदि पात्रों के माध्यम से राम-कथा के विविध आयामों को उजागर किया गया है। विशेष रूप से उर्मिला पर लिखी कविताएं, जो सामान्यतः उपेक्षित पात्र मानी जाती हैं, पाठक को अंदर तक झकझोरती हैं। क्या है विशेष भावनात्मक गहराई: हर कविता में एक आत्मिक संवाद है, जो पाठक को आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करता है। नारी दृष्टिकोण: पूजाश्री ने रामकथा को एक स्त्री की दृष्टि से देखा है, जो इसे एक नया आयाम देता है। समकालीन सन्दर्भ: रामत्व को केवल मिथकीय कथा तक सीमित न रखकर, लेखिका ने उसे आज के समाज और व्यक्ति के जीवन से जोड़ा है—जो इस कृति को आज के युग के लिए प्रासंगिक बनाता है। राममय एक ऐसा काव्य-संग्रह है जो धार्मिक आस्था, काव्य-रस और दर्शन की त्रिवेणी में स्नान करने जैसा अनुभव देता है। स्याही प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक उन सभी पाठकों के लिए एक अमूल्य उपहार है जो भारतीय संस्कृति, भक्ति और साहित्य में रुचि रखते हैं। रेटिंग: ★★★★★ (5 में से 4.8) यह पुस्तक निश्चित रूप से आपकी पुस्तकालय की शोभा बढ़ाएगी।






Reviews
There are no reviews yet.