‘हनुमत सतक’ अवधी भाषा में रचित एक अनूठा और हृदयस्पर्शी काव्य संग्रह है, जिसे वाराणसी के प्रतिष्ठित स्याही प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक में संकटमोचन भगवान श्री हनुमान जी को समर्पित 100 उत्कृष्ट घनाक्षरियां संकलित हैं। कवि ने ये रचनाएं अपने जीवन की अथाह पीड़ा और कठिन काल में प्रभु का स्मरण करते हुए रची थीं। भक्ति, समर्पण और काव्य-शिल्प का यह संगम हर पाठक के हृदय को छू लेने वाला है।
अवधी साहित्य के क्षेत्र में जहाँ ‘सतक’ परंपरा का बड़ा अकाल रहा है, वहीं यह पुस्तक उस शून्यता को भरने का एक अत्यंत सराहनीय और सफल प्रयास है। पुस्तक की भाषा और प्रवाह को देखकर अवधी भाषा पर कवि का असाधारण और साफ-साध अधिकार जाहिर होता है।
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लेखक (Author): दीनानाथ द्विवेदी ‘रंग’ (उपनिदेशक, प्रशिक्षण विभाग)
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संपादक (Editor): वरिष्ठ संपादक पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’
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प्रकाशक (Publisher): स्याही प्रकाशन, वाराणसी
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भाषा (Language): अवधी / हिंदी (Awadhi / Hindi)
मुख्य विशेषताएं (Key Features)
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अनूठी काव्य शैली: भगवान श्री हनुमान जी पर आधारित 100 भक्तिपूर्ण घनाक्षरियों का दुर्लभ संग्रह।
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अवधी साहित्य की अनमोल धरोहर: संस्कृत और हिंदी में अनेक शतक लिखे गए हैं, लेकिन अवधी भाषा में ‘सतक’ परंपरा की कमी को पूरा करती यह एक विशिष्ट पुस्तक है।
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भक्ति और संवेदना का प्रवाह: जीवन के संघर्षों और पीड़ा के बीच उपजी यह रचना पाठक को आध्यात्मिक शांति और संबल प्रदान करती है।
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वरिष्ठ संपादन: हिंदी साहित्य के वरिष्ठ संपादक पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ द्वारा कुशल संपादन।
पाठकों के लिए क्यों खास है?
यदि आप हिंदी साहित्य, विशेषकर कविता और छंदों के पारखी हैं, या अवधी भाषा की मिठास और समृद्ध परंपरा से जुड़ाव महसूस करते हैं, तो यह किताब आपकी पर्सनल लाइब्रेरी में जरूर होनी चाहिए। यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि संकटों से उबरने के लिए प्रभु हनुमान के चरणों में समर्पित एक कवि की अनन्य भक्ति का दस्तावेज है।
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