पुस्तक परिचय::: ‘अनुगीतिका’ (भाग–प्रथम) हिन्दी साहित्य की काव्य परम्परा में एक ऐतिहासिक और वैचारिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आई है। यह कृति हिन्दी की नवसृजित काव्य विधा ‘अनुगीत’ का प्रथम संगठित, सैद्धान्तिक और रचनात्मक दस्तावेज़ है, जिसका विधिवत लोकार्पण काशी की पुण्यभूमि से हुआ—वही काशी, जिसने सदियों से हिन्दी साहित्य को दिशा, दृष्टि और आधार प्रदान किया है। ‘अनुगीत’ ऐसी काव्य विधा है जो ग़ज़ल की सौन्दर्यात्मक संरचना से संवाद करती है, किंतु उसकी आत्मा, भाषा और संवेदना पूर्णतः हिन्दी में प्रतिष्ठित है।
यह विधा उस लंबे वैचारिक द्वंद्व का समाधान प्रस्तुत करती है, जो वर्षों से तथाकथित ‘हिन्दी ग़ज़ल’ और उर्दू ग़ज़ल के बीच भाषा और स्वीकार्यता को लेकर बना रहा। ‘अनुगीत’ इस द्वंद्व को समाप्त करते हुए हिन्दी को उसकी अपनी स्वतंत्र काव्य पहचान प्रदान करता है। यह साझा संग्रह प्रेम, जीवन, समाज, मानवीय संवेदना, समकालीन यथार्थ और आध्यात्मिक चेतना को नवीन काव्य शिल्प में प्रस्तुत करता है। संग्रह में सम्मिलित रचनाएँ पाठक को न केवल भावनात्मक स्तर पर स्पर्श करती हैं, बल्कि उसे भाषा, अभिव्यक्ति और काव्य–विधान पर नए सिरे से सोचने के लिए प्रेरित भी करती हैं। इस महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल के सूत्रधार पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ हैं—जो इस कृति के प्रधान संपादक एवं प्रकाशक दोनों हैं। वे हिन्दी साहित्य के ऐसे सजग हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने लेखन, संपादन और प्रकाशन—तीनों स्तरों पर निरंतर सृजनात्मक हस्तक्षेप किया है।
‘स्याही प्रकाशन’ के माध्यम से उन्होंने न केवल नवोदित रचनाकारों को मंच दिया है, बल्कि साहित्य की नई धाराओं और विधाओं को भी प्रोत्साहित किया है। ‘अनुगीतिका’ का संपादन गहन साहित्यिक समझ, भाषिक अनुशासन और सौन्दर्यबोध का उत्कृष्ट उदाहरण है। पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने इस संग्रह में रचनाओं का चयन करते समय गुणवत्ता, मौलिकता और विधागत शुद्धता को सर्वोपरि रखा है, जिससे यह कृति शोधार्थियों, साहित्यकारों और गम्भीर पाठकों के लिए एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में भी प्रतिष्ठित हो सके।
‘अनुगीतिका’ (भाग–प्रथम) केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि हिन्दी साहित्य में एक नई विधा की औपचारिक घोषणा है। यह पुस्तक हिन्दी काव्य के भविष्य की ओर संकेत करती है और साहित्यिक सौहार्द, भाषिक स्वाभिमान तथा सृजनात्मक स्वतंत्रता का सशक्त दस्तावेज़ बनकर उभरती है। ‘अनुगीतिका’ का प्रकाशन स्याही प्रकाशन द्वारा किया गया है। यह संग्रह संस्करण–2025, भाषा—हिन्दी, विधा—काव्य में प्रकाशित हुआ है। आयोजकों ने बताया कि ‘अनुगीतिका’ के आगामी भाग भी शीघ्र प्रकाशित किए जाएंगे। प्रस्तुत साझा संग्रह में डॉ0 चन्द्रभाल सुकुमार, दीनानाथ द्विवेदी रंग, माधुरी मिश्रा, करूणा सिंह, बुद्धदेव तिवारी, पुष्पेन्द्र अस्थाना ‘पुष्प’, सुनिल सेठ व जीएल पटेल ‘अयन’ सहित संपादक ‘कुण्ठित जी’ भी शामिल हैं।







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