पुस्तक का नाम – ‘भारतीय दार्शनिक विचार और लोक कल्याण’—भाषा – हिन्दी — लेखक – नरेन्द्र बहादुर सिंह — प्रकाशन – स्याही प्रकाशन — सम्पादक – पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ — भारतीय दर्शन एवं उसकी गहराई को समझने में सहायक और जीवन में मार्गदर्शक सिद्ध होगी यह पुस्तक — जन्म क्यों मिला? किसने दिया? क्या है? जीवन और उसका उद्देश्य क्या है, मृत्यु क्यों होती है? मृत्यु के बाद क्या है? जगत क्या है? और ईश्वर का अस्तित्व है कि नहीं है? इसके अलावा पाप-पुण्य के मानदण्ड ठीक हैं कि नहीं? अन्तिम सत्य क्या है? ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिनका उत्तर युगों से खोजा जा रहा है। सृष्टि में तथा समाज के प्रत्येक स्वरूप में एक सुगठित योजना दिखाई देती है और उस योजना का कोई भेद भी है। ऐसे में अनेक लोग इसकी खोज में अपने चेतना के उच्च आयाम तक गए। वह जीवन के प्रत्येक पहलू को जाँचे, परखे। ऐसे लोग ऋषि-महर्षि व दार्शनिक हुए। इतिहास के दार्शनिक दस्तावेजों में ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर छुपे मिलते हैं। लेखक के अनुसन्धान में इन सभी सवालों के जवाब हैं। लेखक ने अपने चिन्तन से यह सिद्ध किया है कि लोकहित दर्शन का मूल है। नरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा लिखित भारतीय दार्शनिक विचार और लोकहित भारतीय दर्शन की गहनता, उसकी समाजोन्मुखी दृष्टि और लोकहित में उसकी प्रासंगिकता को उजागर करती है। यह पुस्तक भारतीय दार्शनिक परंपराओं के बहुस्तरीय पहलुओं को समझाने के साथ-साथ भगवान बुद्ध व महावीर जैन के दर्शन को एक विशेष स्थान प्रदान करती है। जीवन, जीव, ईश्वर, जगत, धर्म, श्रद्धा, भक्ति, प्रेम और करुणा जैसे अनेक प्रश्न एवं उनके उत्तर की खोज हमें दर्शन की ओर ले जाती है। दर्शन का शाब्दिक अर्थ है: सत्य की खोज या जीवन और ब्रह्मांड के रहस्यों का विवेचन। यह ज्ञान की वह शाखा है, जो मानव जीवन, अस्तित्व, नैतिकता, ज्ञान और सत्य के बुनियादी प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करती है। वहीं, दार्शनिक वह है, जो गहन चिंतन और विश्लेषण के माध्यम से इन प्रश्नों का उत्तर खोजने में समर्पित होता है। पुस्तक के मुख्य भागों में भगवान बुद्ध एवं महावीर जैन के दर्शन को न केवल प्राचीन भारत का महान विचार बताया गया है, बल्कि इसे आज के समाज के लिए भी प्रासंगिक और श्रेष्ठ सिद्ध किया गया है। बुद्ध का ‘मध्यम मार्ग’ और ‘अष्टांगिक मार्ग’ और महावीर जैन के विचार मानव जीवन को संतुलित और सुकूनमय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान है। उनके सिद्धान्त न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करते हैं। बुद्ध तथा महावीर के अहिंसा का सिद्धान्त और सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव आज की हिंसा-प्रवृत्त दुनिया में अत्यंत प्रासंगिक है। लेखक ने यह दर्शाया है कि बुद्ध और महावीर के दृष्टिकोण व्यक्ति को अपने आंतरिक और बाहरी संसार में सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रेरित करता है। यह विचार न केवल आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है, बल्कि सामाजिक कल्याण और लोकहित की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देता है। पुस्तक भारतीय दर्शन के लोकहितकारी स्वरूप को प्रमुखता से रेखांकित करती है। यह तर्क प्रस्तुत करती है कि प्राचीन भारतीय विचारधारा केवल आत्मज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि समाज को नैतिक और आध्यात्मिक आधार प्रदान करने का उद्देश्य भी रखती थी। विशेष रूप से, लेखक ने महात्मा बुद्ध तथा महावीर जैन के विचारों को उन सामाजिक संरचनाओं में क्रांति का प्रतीक बताया है, जो शोषण और असमानता पर आधारित थीं। लेखक की शैली स्पष्ट और तथ्यपूर्ण है। जटिल दार्शनिक विचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने पाठकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया है। बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को आधुनिक संदर्भ में जोड़ते हुए, यह पुस्तक व्यक्ति और समाज दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है। भारतीय दार्शनिक विचार और लोकहित एक ऐसी पुस्तक है, जो न केवल भारतीय दर्शन की गहराई को समझने में सहायक है, बल्कि इसे आधुनिक समाज के लिए मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करती है। भगवान बुद्ध एवं महावीर जैन के दर्शन को जिस व्यापकता और गहराई से लेखक ने चित्रित किया है, वह इस पुस्तक को विशेष बनाता है। यह पुस्तक दर्शन में रुचि रखने वालों और समाज सुधार की आकांक्षा रखने वालों के लिए एक अनमोल कृति है।
भारतीय दार्शनिक विचार और लोक कल्याण
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+ Free Shippingलेखक ने महात्मा बुद्ध तथा महावीर जैन के विचारों को उन सामाजिक संरचनाओं में क्रांति का प्रतीक बताया है, जो शोषण और असमानता पर आधारित थीं। लेखक की शैली स्पष्ट और तथ्यपूर्ण है। जटिल दार्शनिक विचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने पाठकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया है। बुद्ध के विचारों की प्रासंगिकता को आधुनिक संदर्भ में जोड़ते हुए, यह पुस्तक व्यक्ति और समाज दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है। भारतीय दार्शनिक विचार और लोकहित एक ऐसी पुस्तक है, जो न केवल भारतीय दर्शन की गहराई को समझने में सहायक है, बल्कि इसे आधुनिक समाज के लिए मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करती है। भगवान बुद्ध एवं महावीर जैन के दर्शन को जिस व्यापकता और गहराई से लेखक ने चित्रित किया है, वह इस पुस्तक को विशेष बनाता है। यह पुस्तक दर्शन में रुचि रखने वालों और समाज सुधार की आकांक्षा रखने वालों के लिए एक अनमोल कृति है।







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