“सूख रहा पौधा सुराज का”
काशी की उर्वर साहित्यिक धरा के वरिष्ठ गीतकार श्री सूर्य प्रकाश मिश्र द्वारा रचित और वाराणसी के प्रतिष्ठित प्रकाशन स्याही प्रकाशन द्वारा प्रकाशित गीत-पुस्तिका “सूख रहा पौधा सुराज का” हिंदी साहित्य जगत में एक अप्रतिम कृति है। यह पुस्तक छायावाद की शैली को आत्मसात करते हुए, वाद-विवाद से परे एक शुद्ध एवं मौलिक काव्यात्मक परंपरा का निर्वहन करती है।
कृति की विशेषताएँ:
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विषय-वस्तु: यह गीत-संग्रह ग्रामांचल के उन संवेदनशील और श्रेष्ठ बिंदुओं को स्पर्श करता है, जो प्रायः मुख्यधारा के साहित्य में ओझल हो जाते हैं। पुस्तक की विषय-वस्तु की गहराई और विस्तार इतना व्यापक है कि उसकी तुलना ‘समंदर’ से की जा सकती है, जो पाठक द्वारा दी गई अल्प राशि के सापेक्ष कहीं अधिक समृद्ध और मूल्यवान है।
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संपादन:
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संरचना: यह एक अत्यंत पठनीय और संग्रहणीय कृति है। पुस्तक में कुल 96 पृष्ठ हैं, कवर पृष्ठ को मिलाकर इसकी संख्या 100 होती है, तथा आभार पृष्ठ सहित यह कुल 101 पृष्ठों की एक मुकम्मल रचना है।
यह पुस्तक मात्र गीतों का संकलन नहीं है, बल्कि यह समय की धड़कन और माटी की पुकार को स्वर देने का एक ईमानदार प्रयास है। हिंदी साहित्य के पाठकों और गीत विधा के प्रेमियों के लिए यह निश्चित ही एक संग्रहणीय कृति है।







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