पुस्तक का नाम: ‘गीत रसाल’
विघा: गीत-काव्य
प्रकाशन: स्याही प्रकाशन
प्रकाशक व सम्पादक: पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’
भाषा: हिन्दी संस्करण: 2024
वाराणसी के वरिष्ठ साहित्यकारों में गिने जाने वाले शाइर व कवि डॉ. महेंद्र नाथ तिवारी ‘अलंकार’ की यह गीत-काव्य रचना ‘गीत रसाल’ काशी में प्रकाशन से पहले ही काफी चर्चा में रही है। यह पुस्तक काव्य में गीत, मुक्तक व गजल प्रकृति की कई रचनाओं को समेकित किए हुए एक काव्य संकलन के रूप में प्रकाशित की गई है। ‘गीत रसाल’ का प्रकाशन देश के प्रतिष्ठित प्रकाशन प्रतिष्ठानों में शुमार ‘स्याही प्रकाशन’ ने किया है, और अपने प्रकाशन व अनोखे प्रकाशकीय शैली के लिए जाने जाने वाले पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ (वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार व संपादक) ने इसका संपादन किया है। यह पुस्तक गीत-काव्य रचना ‘गीत रसाल’ अपने अनोखी रचना प्रणाली व अलंकार जी के समृद्ध साहित्यिक बोध के साथ उनकी अनूठी शैली को प्रकट करने के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने अपने पूरे कौशल से पाठकों के लिए एक उत्कृष्ट काव्य कुंज प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। वैसे वह बनारस के अच्छे रचनाकारों में गिने भी जाते हैं। प्रकाशकीय श्रेष्ठता के तौर पर यह पुस्तक आवरण से अंतर पृष्ठों तक अनुपम व सुन्दरतम बन पड़ी है। यह पुस्तक मूर्धन्य साहित्यकारों के लिए तो उपयोगी है ही साहित्य के विद्यार्थियों व नवोदित कवियों के लिए भी पढ़ने व सिखाने के लिए आवश्यक पाठ्य सामग्री है। महेन्द्र अलंकार जी की रचनाएं साहित्यिक समाज को साहित्य की सीख व नए प्रतिबिंब देती हैं। इस पुस्तक में उनकी नवीनता व उनके शैली का अनूठा पन साहित्य प्रेमियों को मिलेगा। यह एक अमर कृति है।






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