उद्गार शतक
उद्गार शतक (साझा हिन्दी काव्य संग्रह) प्रकाशन : स्याही प्रकाशन प्रकाशक व प्रधान संपादक : पं. छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ सहयोगी संगठन : उद्गार (साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन) पुस्तक के विषय में: ‘उद्गार शतक’ केवल एक साझा काव्य संग्रह नहीं, बल्कि यह हिन्दी साहित्य की उस प्रवाहमान चेतना का जीवंत दस्तावेज है, जिसने देशभर के रचनाकारों को एक मंच पर समेटा है। यह संग्रह उद्गार संगठन के दस वर्षों की सृजनशील यात्रा और सौ से अधिक साहित्यिक संगोष्ठियों के गौरवशाली पड़ाव की स्मृति में प्रकाशित किया गया है। इस संग्रह में 100 से अधिक कवियों की विविध रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ संकलित हैं — जिनमें प्रेम, प्रकृति, राष्ट्र, सामाजिक सरोकार, जीवन दर्शन, आध्यात्म और संवेदना के स्वर समान रूप से मुखर हैं। विशेषताएँ: 100+ चयनित कवियों की प्रतिनिधि रचनाएँ, जिनमें नवोदित और प्रतिष्ठित साहित्यकारों की समान भागीदारी है। अनुभवी संपादन: पं. छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ द्वारा सजीव साहित्यिक अनुभव और भावनाओं का समावेश उत्कृष्ट मुद्रण एवं आकर्षक प्रस्तुति संग्रहणीय साहित्यिक स्मारिका साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी गहन अनुभूतियाँ। प्रत्येक कविता में जीवन के विभिन्न रंग और भावनाएँ—प्रेम, पीड़ा, संघर्ष, सौंदर्य और आशा का समावेश। वाराणसी जैसे सांस्कृतिक नगर की पावन भूमि से प्रकाशित, जिसकी आत्मा से जुड़ा है ‘उद्गार’ संगठन का नाम। किन्हें पढ़नी चाहिए यह पुस्तक? जो साहित्यिक सौंदर्य और विविधता को पढ़ना चाहते हैं जो हिन्दी कविता के वर्तमान स्वरूप को समझना चाहते हैं जो देशभर के साहित्यकारों की सोच और संवेदना से जुड़ना चाहते हैं काव्य प्रेमियों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और हिन्दी भाषा के साधकों के लिए यह संग्रह एक प्रेरणा स्रोत है।
जो लोग आधुनिक हिन्दी कविता के बदलते स्वरूप को समझना चाहते हैं, उनके लिए यह संग्रह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। पुस्तक का उद्देश्य: ‘उद्गार शतक’ का उद्देश्य केवल साहित्य का प्रकाशन नहीं, बल्कि हिन्दी कविता को जनमानस से जोड़ना, नवलेखकों को मंच देना और साहित्यिक संवाद को सुदृढ़ बनाना है। उपलब्ध स्वरूप: हार्डकॉपी (पेपरबैक) शाफ्ट कॉपी (ई-बुक) (भविष्य में अन्य प्रारूप में भी उपलब्ध होगी।) पुस्तक का सार: ‘उद्गार शतक’ मात्र एक साझा काव्य संग्रह नहीं, बल्कि यह सौ हृदयों की धड़कनों को समेटे एक साहित्यिक महाकाव्य है। यह संग्रह हिन्दी कविता के विविध रंगों—श्रृंगार, वीर, भक्ति, करुणा, हास्य, प्रकृति, सामाजिक चेतना एवं आत्मअन्वेषण—को एक ही मंच पर एकत्र करता है। प्रख्यात संपादक पं. छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ की कुशल संपादन दृष्टि ने इस कृति को न केवल संग्रहणीय बल्कि साहित्यिक शोध के लिए भी उपयुक्त बनाया है।
सीमित विशेष संस्करण (विशेष रचनाकारों के हस्ताक्षर सहित) – केवल आयोजनों में उपलब्ध ‘उद्गार शतक’ एक अद्वितीय संग्रह है – जो वर्तमान हिन्दी कविता के जीवंत दस्तावेज के रूप में आपके संग्रहालय में स्थान पाने योग्य है। इसे पढ़ें, साझा करें और सहेजें। 🛒 अब ऑर्डर करें और साहित्यिक आनंद की इस यात्रा का हिस्सा बनें! उद्गार की एक पुकार: यह संग्रह एक आंदोलन है—हिन्दी को पढ़ने, लिखने और जीने का। हम आमंत्रित करते हैं आपको इस काव्य-यात्रा में सहभागी बनने के लिए। अब ‘उद्गार शतक’ प्राप्त करें – और सौ कवियों की आत्मा से निकलते शब्दों को अपने मन में गूंजते हुए महसूस करें। 🖼️ पुस्तक प्राप्ति के बाद अपनी एक तस्वीर साझा करें – बने उद्गार परिवार का हिस्सा।








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