पुस्तक का नाम: ‘धरणीसुता’
विधा: काव्य प्रकाशन: स्याही प्रकाशन
प्रकाशक व सम्पादक: पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’
भाषा: भोजपुरी संस्करण: 2023
पुस्तक विवरण –
चंदौली जनपद के सोगाई गांव के रहने वाले व सिंचाई विभाग से सेवानिवृत कवि श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्त ‘बावरा’ बेहद मीठे व विनम्र स्वभाव के रचनाकार हैं। उनकी यह काव्य कृति माता जानकी को आधार व केंद्र में रख के लिखी गई है। यह रचना पूरी तरह छन्दोवद्ध है और इसमें लोक प्रयुक्त शब्दों व शब्दावलियों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया गया है। लोक भाषा से लिए गए शब्दों के द्वारा निर्मित किए गए इस काव्य को भोजपुरी के काव्य श्रेणी में सहेजा जा रहा है, और अपने ग्राम्य सौंदर्य को समेटे हुए छंदों का श्रृंगार करते हुए लेखक व कवि काव्य प्रेमियों को एक नई दुनिया में लेकर जाता है। समर्थ कवि पाठकों का एक नए आलोक से परिचय करता है। कवि बावरा साहित्य के पथ पर वाकई ‘बावरा’ समर्पित हैं और जाने पहचाने व माने जाते हैं। उनकी लेखनी सदा से साहित्य को समर्पित रही है। और, आज के समय में छायावाद के जिस शैली तथा जिस पथ को पड़कर ‘बावरा जी’ चल रहे हैं, उस पर पूरे देश में गिने-चुने ही साहित्यकार दिखाई देते हैं। सभी तरह के काव्य प्रेमियों के लिए ‘धरणीसुता’ एक छोटी किताब जरूर है लेकिन उपयोग काव्य सम्पदा की दृष्टि से बहुत बड़ी पुस्तक बन पड़ी है। सभी को इसे जरूर पढ़ना चाहिए। काव्य रतन बहुत कम प्रकाशित हो पाते हैं। यह पुस्तक वाराणसी के स्याही प्रशासन से प्रकाशित हुई है। इसका संपादन व प्रकाशन अपने प्रकाशन व अनोखे प्रकाशकीय शैली के लिए जाने जाने वाले पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’ (वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार व संपादक) ने किया है।








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