काशी की सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा से उपजा एक सशक्त स्वर—अजफर बनारसी—अपनी पहली ग़ज़ल पुस्तक “प्यासी ज़मीं” के माध्यम से पाठकों के सम्मुख उपस्थित हैं। यह कृति केवल ग़ज़लों का संग्रह नहीं, बल्कि समय, समाज, प्रेम, पीड़ा, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं की वह दस्तावेज़ी अभिव्यक्ति है, जो पाठक के हृदय को भीतर तक स्पर्श करती है। “प्यासी ज़मीं” की ग़ज़लें जीवन की तपती ज़मीन पर बरसती संवेदना की फुहार हैं। इनमें कहीं प्रेम की कोमलता है, कहीं सामाजिक विडंबनाओं की तीखी सचाई, तो कहीं आत्मसंघर्ष और उम्मीद की ज़िद। ग़ज़ल की सभी प्रचलित बहरों में रची गई ये रचनाएँ शायर की गहरी समझ, शिल्प-साधना और भावनात्मक परिपक्वता का प्रमाण हैं। इस महत्वपूर्ण कृति का संपादन किया है देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार और प्रख्यात संपादक पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने, जिनकी सूक्ष्म दृष्टि और साहित्यिक अनुशासन ने पुस्तक को एक सुदृढ़ और परिष्कृत स्वरूप प्रदान किया है। उनका संपादन इस संग्रह को केवल पठनीय ही नहीं, बल्कि संग्रहणीय भी बनाता है।
“प्यासी ज़मीं” का प्रकाशन विख्यात संस्था स्याही प्रकाशन द्वारा किया गया है, जो समकालीन हिंदी साहित्य को नई पहचान देने के लिए जानी जाती है। प्रथम संस्करण (2026) में प्रकाशित यह पुस्तक, अपने प्रकाशन के साथ ही साहित्य प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है। हिंदी और उर्दू ग़ज़ल परंपरा से प्रेम करने वाले पाठकों के लिए यह संग्रह एक अनमोल अनुभव है। सरल, प्रवाहपूर्ण भाषा, सशक्त बिंब और गहरी अनुभूतियों से सजी “प्यासी ज़मीं” आज के समय की ज़रूरत भी है और संवेदनशील मन का आईना भी। यदि आप ग़ज़ल को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि महसूस करना चाहते हैं—तो “प्यासी ज़मीं” आपके पुस्तकालय की अनिवार्य पुस्तक है।









Reviews
There are no reviews yet.