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समर्पण

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डाॅ. जयशंकर सिंह सोलंकी द्वारा रचित पुस्तक “समर्पण” न केवल एक साधारण काव्य संग्रह है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। यह पुस्तक आचार्य श्रीराम शर्मा आचार्य जी की शिक्षाओं और उनके दर्शन पर आधारित है, और इसका उद्देश्य पाठकों को आत्ममंथन, समर्पण और जीवन के उच्च उद्देश्य की ओर प्रेरित करना है। आचार्य श्रीराम शर्मा आचार्य जी के शिष्य डाॅ. जयशंकर सिंह सोलंकी ने जीवन के गहरे अनुभवों को शब्दों में ढालते हुए, सरल और सटीक भाषा में एक ऐसा संदेश दिया है, जो हर व्यक्ति के दिल को छू जाता है। “समर्पण” पुस्तक में आत्मज्ञान, भक्ति, और योग के महत्व को विशेष रूप से व्यक्त किया गया है। इसमें जीवन के संघर्षों, धैर्य और समर्पण के माध्यम से शांति की प्राप्ति का मार्ग दर्शाया गया है।

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पुस्तक का नाम – ‘समर्पण’

भाषा – हिन्दी

लेखक – डाॅ0 जय शंकर सिंह सोलंकी

प्रकाशन – स्याही प्रकाशन

सम्पादक – पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’

पुस्तक नहीं अनुभवों की तिजोरी है पुस्तक “समर्पण”

डाॅ. जयशंकर सिंह सोलंकी द्वारा रचित पुस्तक “समर्पण” न केवल एक साधारण काव्य संग्रह है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। यह पुस्तक आचार्य श्रीराम शर्मा आचार्य जी की शिक्षाओं और उनके दर्शन पर आधारित है, और इसका उद्देश्य पाठकों को आत्ममंथन, समर्पण और जीवन के उच्च उद्देश्य की ओर प्रेरित करना है। आचार्य श्रीराम शर्मा आचार्य जी के शिष्य डाॅ. जयशंकर सिंह सोलंकी ने जीवन के गहरे अनुभवों को शब्दों में ढालते हुए, सरल और सटीक भाषा में एक ऐसा संदेश दिया है, जो हर व्यक्ति के दिल को छू जाता है। “समर्पण” पुस्तक में आत्मज्ञान, भक्ति, और योग के महत्व को विशेष रूप से व्यक्त किया गया है। इसमें जीवन के संघर्षों, धैर्य और समर्पण के माध्यम से शांति की प्राप्ति का मार्ग दर्शाया गया है। इसका सम्पादन अपने काम के लिए दुनिया में मशहूर पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने किया है। पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि मानवता और समर्पण के अद्वितीय दृष्टिकोण से भी भरा हुआ है। डाॅ. सोलंकी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए बताया है कि जब एक व्यक्ति अपने अहंकार को त्याग कर समर्पण की भावना से जीवन को जीता है, तो वह मानसिक शांति और आंतरिक बल प्राप्त करता है। इस पुस्तक का हर पृष्ठ एक नई सीख प्रदान करता है और पाठकों को उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करता है। “समर्पण” पुस्तक का हर अध्याय गहरे विचारों से भरपूर है, जो न केवल आत्म-ज्ञान को समझने में मदद करते हैं, बल्कि यह पाठकों को यह भी सिखाते हैं कि किस प्रकार वे अपने जीवन को एक उच्च उद्देश्य की दिशा में दिशा-निर्देशित कर सकते हैं। किताब में जितनी गहराई से समर्पण के महत्व को बताया गया है, उतनी ही सरलता से इसे समझाया भी गया है, जिससे यह सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयुक्त हो। इस पुस्तक का उद्देश्य केवल अध्यात्मिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि यह लोगों को एक जीवन दृष्टिकोण को अपनाने के लिए भी प्रेरित करती है। पाठक इसके माध्यम से यह समझ सकते हैं कि जीवन का सच्चा अर्थ केवल भौतिक सुखों में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन, समर्पण और सेवा में है। यह पुस्तक न केवल एक आध्यात्मिक संदर्भ में, बल्कि जीवन को एक उद्देश्यपूर्ण दिशा देने के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

“समर्पण” की यह यात्रा आपको जीवन के उच्चतम लक्ष्य की ओर मार्गदर्शन करेगी। 

Weight 80 g
Dimensions 12 × 01 × 13 cm

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