पुस्तक का नाम: जीत के लिए हार की चीत्कार चाहिए
लेखक: कवि बृज बिहारी गुप्ता ‘बृज उत्साह’
संपादक – पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’
प्रकाशक: स्याही प्रकाशन
भाषा: हिन्दी
शैली: प्रेरणात्मक काव्य / सामाजिक चेतना / आत्मोद्धार
“जीत के लिए हार की चीत्कार चाहिए” केवल एक कविता-संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के संघर्ष, साहस और पुनर्जागरण का घोष है। कवि बृज बिहारी गुप्ता ‘बृज उत्साह’ ने इस कृति में मानवीय भावनाओं को नए दृष्टिकोण से स्पर्श किया है — जहाँ हार भी हार नहीं, बल्कि जीत की पहली सीढ़ी बन जाती है। हर कविता जीवन के किसी न किसी मोड़ पर ठहरकर आत्ममंथन करने को प्रेरित करती है। यह संग्रह पाठक के मन में उत्साह का दीप जलाता है और यह संदेश देता है कि— “जो गिरकर भी उठ खड़ा होता है, वही असली विजेता कहलाता है।” पुस्तक की विशेषताएँ- जीवन, संघर्ष और आत्मबल पर केन्द्रित प्रेरणादायक कविताएँ भाषा में सहजता, भाव में गहराई और अभिव्यक्ति में जोश सामाजिक यथार्थ और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय प्रत्येक कविता में सकारात्मक ऊर्जा और नवजागरण का संदेश लेखक परिचय- बृज बिहारी गुप्ता ‘बृज उत्साह’ समकालीन हिन्दी कविता के उन सशक्त कवियों में से हैं, जो जीवन के अनुभवों को सजीव शब्दों में ढालने की क्षमता रखते हैं। उनकी कविताएँ समाज में जागृति लाने, व्यक्ति में आत्मविश्वास भरने और निराशा के अंधकार में प्रकाश खोजने का आह्वान करती हैं।








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