भ्रष्ट व्यवस्था का आँखों देखा विवरण भाग एक, भाग दो, भाग तीन लेखक: नरेन्द्र बहादुर सिंह संपादक: पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ प्रकाशक: स्याही प्रकाशन भारत की नौकरशाही व्यवस्था के भीतर झाँकने वाली एक निर्भीक, सजीव और कटु सत्य से परिपूर्ण रचना — “भ्रष्ट व्यवस्था का आँखों देखा हाल” — पूर्व वरिष्ठ वित्त अधिकारी नरेन्द्र बहादुर सिंह की एक अद्वितीय आत्मकथ्यात्मक दस्तावेज़ है। यह पुस्तक महज़ एक संस्मरण नहीं, बल्कि एक साहसिक सार्वजनिक खुलासा है — जिसमें लेखक ने अपने कार्यकाल के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, पद के दुरुपयोग और सरकारी तंत्र की गिरावट को प्रत्येक घटना के वास्तविक ब्यौरों और नामजद अधिकारियों के साथ ईमानदारी से प्रस्तुत किया है। जहाँ अधिकतर लोग व्यवस्था का हिस्सा बनकर चुप रहते हैं, वहीं नरेन्द्र बहादुर सिंह ने अपनी कलम को हथियार बनाया। वे न केवल भ्रष्टाचार का विरोध करते हैं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया को पाठकों के सामने लाते हैं जिससे एक ईमानदार अधिकारी को रोज़ाना जूझना पड़ता है। यह पुस्तक उन सभी के लिए आँख खोलने वाली है जो समझते हैं कि भ्रष्टाचार केवल खबरों तक सीमित है। संपादक पं. छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने भाषा, शैली और प्रस्तुति को संतुलित बनाकर पाठक तक लेखक की पीड़ा और साहस को प्रभावशाली ढंग से पहुँचाया है। मुख्य विशेषताएँ: व्यवस्था के भीतर की सच्चाई, बिना किसी लाग-लपेट के। हर घटना का स्पष्ट, साक्ष्ययुक्त विवरण। नाम सहित उन व्यक्तियों का ज़िक्र जिन्होंने सेवा के नाम पर व्यवस्था को कलंकित किया। सत्य पर आधारित, भावुक, सटीक और शैलीबद्ध लेखन। ईमानदार अधिकारियों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और जनसेवा में रुचि रखने वालों के लिए अनिवार्य पठनीय सामग्री। पाठकों के लिए क्यों ख़ास है यह पुस्तक? क्योंकि यह उन आवाज़ों में से एक है जो अंदर से निकली है — न नौटंकी, न कल्पना — बस खालिस सच्चाई। अब इसे पढ़ें और जानें कि व्यवस्था का असली चेहरा क्या है — और क्यों ज़रूरी है आज भी ईमानदारी की मशाल जलाए रखना। अब अमेज़ॉन पर उपलब्ध — स्याही प्रकाशन की प्रस्तुति।
भ्रष्ट व्यवस्था का आँखों देखा विवरण (भाग-एक)
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+ Free Shippingभ्रष्ट व्यवस्था का आँखों देखा विवरण भाग एक, भाग दो, भाग तीन लेखक: नरेन्द्र बहादुर सिंह संपादक: पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ प्रकाशक: स्याही प्रकाशन भारत की नौकरशाही व्यवस्था के भीतर झाँकने वाली एक निर्भीक, सजीव और कटु सत्य से परिपूर्ण रचना — “भ्रष्ट व्यवस्था का आँखों देखा हाल” — पूर्व वरिष्ठ वित्त अधिकारी नरेन्द्र बहादुर सिंह की एक अद्वितीय आत्मकथ्यात्मक दस्तावेज़ है। यह पुस्तक महज़ एक संस्मरण नहीं, बल्कि एक साहसिक सार्वजनिक खुलासा है — जिसमें लेखक ने अपने कार्यकाल के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, पद के दुरुपयोग और सरकारी तंत्र की गिरावट को प्रत्येक घटना के वास्तविक ब्यौरों और नामजद अधिकारियों के साथ ईमानदारी से प्रस्तुत किया है। जहाँ अधिकतर लोग व्यवस्था का हिस्सा बनकर चुप रहते हैं, वहीं नरेन्द्र बहादुर सिंह ने अपनी कलम को हथियार बनाया। वे न केवल भ्रष्टाचार का विरोध करते हैं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया को पाठकों के सामने लाते हैं जिससे एक ईमानदार अधिकारी को रोज़ाना जूझना पड़ता है।








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