डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ एक नाटककार के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। इनकी नई काव्य पुस्तक ‘स्वर लहरी’ एक खास श्रेणी का काव्य संग्रह है, जो भारतीय लोकगीत, फिल्मी गीतों की शैली और उनकी अनुगूंज पर आधारित है। यह किताब न केवल गीतों की संरचना और उनकी भावनात्मक गहराई की अभिव्यक्ति को प्रस्तुत करती है, बल्कि फिल्मी गीतों के अन्दाज में जनमानस पर पड़ने वाले प्रभाव का गहरा विश्लेषण भी करती है। इसके संपादक व प्रकाशक पण्डित छतिश द्विवेदी कुण्ठित हैं। साथ ही यह पुस्तक आवरण से लेकर अन्दर तक खूबसूरत बन पड़ी है। ‘स्वर लहरी’ में डा. अनिल सिन्हा ने फिल्मी गीतों की परंपरा को कविता के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने हिंदी सिनेमा के उस शैली के गीतों को अपने काव्य में शामिल किया है, जो जनता के दिलों पर गहरा असर छोड़े हैं। गीतों की शैली, संरचना, और संगीत के साथ उनके भावनात्मक तंतु को छूते हुए, डा. सिन्हा ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि फिल्मी गीत शैली में भी किस प्रकार प्रेम और जनमानस की भावनाओं को अभिव्यक्त किया जा सकता है। उनके द्वारा चुनी गई शैली न केवल मनोरंजन करती है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिबिंब भी प्रस्तुत करती है। डा. सिन्हा की लेखन शैली सहज, प्रवाहमय और संगीतमय है। उन्होंने फिल्मी गीतों के सरल और मधुर भाषा का उपयोग किया है, जो पाठकों को न केवल गीतों की याद दिलाती है बल्कि उनकी धुनें भी मन में गूंजने लगती हैं। कविता की भाषा सरल होते हुए भी गहरे अर्थों को प्रकट करती है, जो आम पाठक के साथ-साथ साहित्य प्रेमियों को भी आकर्षित करती है। यह पुस्तक संकलनीय है।
पुस्तक ‘स्वर लहरी’
कवि: डा. अनिल सिंहा बहुमुखी
संपादक व प्रकाशक: पण्डित छतिश द्विवेदी कुण्ठित
प्रकाशन: स्याही प्रकाशन
विधा: काव्य
भाषा: हिन्दी







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