Sale!

श्री बाबा गुरु पचासा

Original price was: ₹50.00.Current price is: ₹45.00.

+ Free Shipping

श्री गुरु पचासा लेखक: डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाशानन्द’ संपादक: पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ प्रकाशक: स्याही प्रकाशन भाषा: हिंदी (हिंदी-अवधी मिश्रित शैली) विधा: आध्यात्मिक काव्य / चालीसा बाइंडिंग: पेपरबैक पुस्तक परिचय: “श्री गुरु पचासा” एक विलक्षण आध्यात्मिक काव्य संग्रह है, जिसमें 50 पदों के माध्यम से “गुरुओं के गुरु” भगवान वासुदेव की स्तुति की गई है। लेखक डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाशानन्द’ की लेखनी में निष्ठा, भक्ति और आत्मिक समर्पण की गूढ़ गूंज सुनाई देती है। हिंदी और अवधी के सुंदर मिश्रण में रचित यह ग्रंथ पारंपरिक चालीसा शैली को एक नवीन ऊंचाई प्रदान करता है। यह कृति केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है—जिसमें पाठक गुरु-तत्त्व की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप और मार्गदर्शन की शक्ति को गहराई से अनुभव कर सकते हैं।

Guaranteed Safe Checkout
Spread the love

श्री गुरु पचासा लेखक: डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाशानन्द’ संपादक: पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ प्रकाशक: स्याही प्रकाशन भाषा: हिंदी (हिंदी-अवधी मिश्रित शैली) विधा: आध्यात्मिक काव्य / चालीसा बाइंडिंग: पेपरबैक पुस्तक परिचय: “श्री गुरु पचासा” एक विलक्षण आध्यात्मिक काव्य संग्रह है, जिसमें 50 पदों के माध्यम से “गुरुओं के गुरु” भगवान वासुदेव की स्तुति की गई है।

लेखक डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाशानन्द’ की लेखनी में निष्ठा, भक्ति और आत्मिक समर्पण की गूढ़ गूंज सुनाई देती है। हिंदी और अवधी के सुंदर मिश्रण में रचित यह ग्रंथ पारंपरिक चालीसा शैली को एक नवीन ऊंचाई प्रदान करता है। यह कृति केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है—जिसमें पाठक गुरु-तत्त्व की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप और मार्गदर्शन की शक्ति को गहराई से अनुभव कर सकते हैं। लेखक व संपादक परिचय: डॉ. कृष्ण प्रकाश श्रीवास्तव ‘प्रकाशानन्द’—साहित्यिक साधना और आध्यात्मिक चिंतन के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नाम, जिनकी लेखनी में भक्ति और भाषा दोनों की उत्कृष्ट छवि है। पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’—भारतीय साहित्य और आध्यात्मिक संपादन के क्षेत्र में सुविख्यात संपादक व प्रकाशक, जिनकी दृष्टि ने इस कृति को एक श्रेष्ठ प्रस्तुति प्रदान की है।

विशेषताएं: 50 पदों की चालीसा के समकक्ष काव्यरचना हिंदी और अवधी का भावनात्मक संगम गहन भक्ति, सरल भाषा और काव्यात्मक माधुर्य पेपरबैक संस्करण में सुंदर छपाई व डिजाइन आध्यात्मिक साधकों, काव्य प्रेमियों और आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी किनके लिए उपयुक्त? जो गुरु-भक्ति में रुचि रखते हैं जो काव्यात्मक स्तोत्र पढ़ना पसंद करते हैं जो हिंदी-अवधी काव्य की मिठास से जुड़ना चाहते हैं जो धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से आत्मचिंतन करना चाहते हैं “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः… इस पुस्तक में वही दिव्यता काव्य में सजीव होती है।”

“श्री गुरु पचासा”—पढ़िए, अनुभव कीजिए और अपने जीवन में गुरुतत्त्व का प्रकाश भरिए। चाहें आप एक भक्त हों, साहित्य-प्रेमी हों या अध्यात्म के पथिक—यह पुस्तक आपकी निजी लाइब्रेरी में एक अनमोल रत्न सिद्ध होगी।

Spread the love
Weight 50 g
Dimensions 8 × 1 × 6 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “श्री बाबा गुरु पचासा”

Your email address will not be published. Required fields are marked *