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तुम्हारी ग़ज़ल

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काशी, जो सदियों से साहित्य, संगीत और साधना की उर्वर भूमि रही है, उसी सांस्कृतिक चेतना से जन्मी है यह संवेदनशील और बहुचर्चित हिन्दी ग़ज़ल कृति “तुम्हारी ग़ज़ल”। यह पुस्तक नवोदित शायरा की होते हुए भी अपने भाव-सौंदर्य, भाषा की सादगी और अनुभूतियों की गहराई के कारण अल्प समय में पाठकों तथा साहित्यिक जगत में विशेष पहचान बना चुकी है। कोमल मन, भावपूर्ण जीवन, प्यार भरे सुगंधित विचारों की लेखिका, कवयित्री व शायरा डॉक्टर प्रियंका तिवारी ‘‘ग़ज़ल’’ ने इस ग़ज़ल संग्रह में अपने जीवन के प्रेमानुभवों, अनुरोधों, प्रेमाग्रहों को अत्यंत ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ शब्दों में ढाला है। यहाँ प्रेम केवल एक भाव नहीं, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षाओं, पीड़ाओं और आत्मिक स्वीकारों का समग्र रूप बनकर, एक काल्पनिक नहीं दैवी प्रतिमूर्ति बनकर सामने आता है। उनकी ग़ज़लें पाठक को केवल प्रेम भरी ग़ज़ल पढ़ने का अनुभव नहीं देतीं, बल्कि उसे अपनी ही भावनाओं के आमने-सामने खड़ा कर देती हैं। उसकी अपनी चाहत सी जान पड़ती हैं। बड़ी सुहाती हैं। पुस्तक के शेर इतने सहज और आत्मीय हैं कि वे किसी अलंकारिक आडंबर के बिना सीधे हृदय तक पहुँचते हैं।

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काशी, जो सदियों से साहित्य, संगीत और साधना की उर्वर भूमि रही है, उसी सांस्कृतिक चेतना से जन्मी है यह संवेदनशील और बहुचर्चित हिन्दी ग़ज़ल कृति “तुम्हारी ग़ज़ल”। यह पुस्तक नवोदित शायरा की होते हुए भी अपने भाव-सौंदर्य, भाषा की सादगी और अनुभूतियों की गहराई के कारण अल्प समय में पाठकों तथा साहित्यिक जगत में विशेष पहचान बना चुकी है। कोमल मन, भावपूर्ण जीवन, प्यार भरे सुगंधित विचारों की लेखिका, कवयित्री व शायरा डॉक्टर प्रियंका तिवारी ‘‘ग़ज़ल’’ ने इस ग़ज़ल संग्रह में अपने जीवन के प्रेमानुभवों, अनुरोधों, प्रेमाग्रहों को अत्यंत ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ शब्दों में ढाला है। यहाँ प्रेम केवल एक भाव नहीं, बल्कि स्मृतियों, प्रतीक्षाओं, पीड़ाओं और आत्मिक स्वीकारों का समग्र रूप बनकर, एक काल्पनिक नहीं दैवी प्रतिमूर्ति बनकर सामने आता है। उनकी ग़ज़लें पाठक को केवल प्रेम भरी ग़ज़ल पढ़ने का अनुभव नहीं देतीं, बल्कि उसे अपनी ही भावनाओं के आमने-सामने खड़ा कर देती हैं। उसकी अपनी चाहत सी जान पड़ती हैं। बड़ी सुहाती हैं। पुस्तक के शेर इतने सहज और आत्मीय हैं कि वे किसी अलंकारिक आडंबर के बिना सीधे हृदय तक पहुँचते हैं। शब्दों की संरचना, भावों की प्रवाहमयता और अभिव्यक्ति की मोहन शैली पाठक को यह अनुभूति कराती है कि ये पंक्तियाँ उसके अपने मन से स्वतः निकलकर काग़ज़ पर उतर आई हों। प्रेम की कोमलता के साथ-साथ प्रेमजनित पीड़ा, अधूरी चाहतें और मौन संवाद इस संग्रह को गहराई प्रदान करते हैं। इस कृति के संपादन का दायित्व हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित संपादक पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने निभाया है, जिनकी साहित्यिक दृष्टि ने इस संग्रह को एक परिपक्व और सुसंगठित रूप प्रदान किया है। साथ ही इसको उर्दू-हिन्दी ग़ज़ल परंपरा के अनुभवी शायर शमीम ग़ाज़ीपुरी के मार्गदर्शन में रचा गया है, जिससे इसमें शास्त्रीय ग़ज़ल की गरिमा और समकालीन भावबोध का सुंदर संतुलन दिखाई देता है। “तुम्हारी ग़ज़ल” उन पाठकों के लिए विशेष है, जो प्रेम को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि महसूस करना चाहते हैं। यह पुस्तक हिन्दी ग़ज़ल के सौन्दर्य पक्ष और समकालीन परिदृश्य में एक संवेदनशील और शीर्ष हस्ताक्षर के रूप में अपनी जगह बनाती है। :::: विशेषताएँ :: — ग़ज़लों में जीवन के सच्चे प्रेम अनुभवों की सशक्त अभिव्यक्ति, सरल, मोहक और हृदयस्पर्शी भाषा, जो सीधे पाठक के मन से संवाद करती है, शेर ऐसे, मानो पाठक की अपनी ही अनुभूति शब्दों में ढल गई हो, काशी की ग़ज़ल परंपरा और समकालीन भावबोध का सुंदर समन्वय, ::: :::: क्यों पढ़ें यह पुस्तक?—यदि आप हिन्दी ग़ज़ल प्रेमी हैं, यदि आपको प्रेम, विरह और भावनात्मक सच्चाई से भरी रचनाएँ पसंद हैं, यदि आप नई लेकिन प्रभावशाली साहित्यिक आवाज़ को पढ़ना चाहते हैं, :::: “तुम्हारी ग़ज़ल” केवल एक काव्य-संग्रह नहीं, बल्कि प्रेम के कोमल और पीड़ामय पक्षों का भावपूर्ण दस्तावेज़ है, जो हर संवेदनशील पाठक के हृदय को छू जाने की क्षमता रखता है। :::: आज ही ऑर्डर करें और हिन्दी ग़ज़ल की इस ताज़ा, सुगंधित कृति को अपनाएँ।

Weight 100 g
Dimensions 12 × 02 × 19 cm

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