Sale!

चिड़ पिड़ चूँ चूँ

Original price was: ₹440.00.Current price is: ₹390.00.

+ Free Shipping

वरिष्ठ व्यंग्यकार देवेंद्र पांडेय ‘बेचैन आत्मा’ की नवीनतम कृति ‘चिड़ पिड़ चूँ चूँ’ समकालीन हिंदी व्यंग्य साहित्य में एक सशक्त और विशिष्ट हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है। यह पुस्तक केवल व्यंग्यों का संग्रह नहीं, बल्कि आधुनिक समाज की आत्मा का एक्स-रे है, जिसमें व्यवस्था, व्यक्ति और मूल्य—तीनों की वास्तविक तस्वीर पूरी बेबाकी से उभरकर सामने आती है। इस संग्रह में छोटे-छोटे सैकड़ों व्यंग्य शामिल हैं, जो आकार में भले ही लघु हों, किंतु प्रभाव में अत्यंत व्यापक और तीक्ष्ण हैं। लेखक ने इन व्यंग्यों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, नैतिक पतन, अवसरवादिता, दिखावटी सभ्यता, राजनीतिक छल, प्रशासनिक जड़ता और आम आदमी के भीतर पल रही विवशताओं को अत्यंत सहज किंतु मारक शैली में प्रस्तुत किया है।

Guaranteed Safe Checkout

पुस्तक का नाम : चिड़ पिड़ चूँ चूँ

लेखक : देवेंद्र पांडेय ‘बेचैन आत्मा’ (वरिष्ठ कवि, व्यंग्यकार एवं यात्रा-वृत्त निबंधकार)

भाषा : हिंदी

विधा : व्यंग्य

प्रकाशन / प्रकाशक : स्याही प्रकाशन

संपादक : पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ (वरिष्ठ संपादक एवं प्रकाशक)

वरिष्ठ व्यंग्यकार देवेंद्र पांडेय ‘बेचैन आत्मा’ की नवीनतम कृति ‘चिड़ पिड़ चूँ चूँ’ समकालीन हिंदी व्यंग्य साहित्य में एक सशक्त और विशिष्ट हस्तक्षेप के रूप में सामने आती है। यह पुस्तक केवल व्यंग्यों का संग्रह नहीं, बल्कि आधुनिक समाज की आत्मा का एक्स-रे है, जिसमें व्यवस्था, व्यक्ति और मूल्य—तीनों की वास्तविक तस्वीर पूरी बेबाकी से उभरकर सामने आती है। इस संग्रह में छोटे-छोटे सैकड़ों व्यंग्य शामिल हैं, जो आकार में भले ही लघु हों, किंतु प्रभाव में अत्यंत व्यापक और तीक्ष्ण हैं। लेखक ने इन व्यंग्यों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, नैतिक पतन, अवसरवादिता, दिखावटी सभ्यता, राजनीतिक छल, प्रशासनिक जड़ता और आम आदमी के भीतर पल रही विवशताओं को अत्यंत सहज किंतु मारक शैली में प्रस्तुत किया है। हर व्यंग्य एक ऐसा दर्पण है, जिसमें पाठक हँसते-हँसते स्वयं को और अपने आसपास की व्यवस्था को पहचानने लगता है। देवेंद्र पांडेय ‘बेचैन आत्मा’ की व्यंग्य दृष्टि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि पाठक को सोचने, सवाल करने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और आम बोलचाल के बेहद निकट है, जिससे व्यंग्य सीधे पाठक के मन तक पहुँचता है। कटाक्ष, प्रतीक, संकेत, विडंबना और सहज हास्य का संतुलित प्रयोग इस पुस्तक को पठनीय ही नहीं, स्मरणीय भी बनाता है। लेखक वाराणसी जनपद के ऐतिहासिक क्षेत्र सारनाथ में निवास करते हैं और हिंदी साहित्य में एक सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध रचनाकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी रचनाएँ समाज के भीतर छिपी सच्चाइयों को बिना किसी बनावटी आवरण के सामने रखती हैं। ‘चिड़ पिड़ चूँ चूँ’ उनके दीर्घ साहित्यिक अनुभव, सूक्ष्म अवलोकन और व्यंग्यात्मक चेतना का सशक्त प्रमाण है। इस पुस्तक को स्याही प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है, जो समकालीन हिंदी साहित्य में गुणवत्तापूर्ण, विचारोत्तेजक और मूल्यवान पुस्तकों के प्रकाशन के लिए जाना जाता है। स्याही प्रकाशन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि वह केवल पुस्तकें नहीं छापता, बल्कि साहित्यिक सरोकारों को पूरी ईमानदारी से पाठकों तक पहुँचाने का कार्य करता है। पुस्तक का संपादन पंडित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ जैसे अनुभवी, विद्वान और सजग संपादक के हाथों हुआ है। उनका संपादकीय दृष्टिकोण, भाषा-संवेदना और साहित्यिक अनुशासन इस कृति में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। संपादक के रूप में उन्होंने न केवल रचनाओं की मौलिकता और प्रवाह को सुरक्षित रखा है, बल्कि पुस्तक को एक सुसंगठित, प्रभावशाली और संग्रहणीय स्वरूप भी प्रदान किया है। ::: क्यों पढ़ें यह पुस्तक? ::: यदि आप केवल हँसना नहीं, बल्कि सच्चाई से रूबरू होना चाहते हैं। यदि आप समाज, व्यवस्था और मनुष्य को व्यंग्य की पैनी दृष्टि से समझना चाहते हैं। यदि आप हल्के शब्दों में कही गई गहरी बातों का स्वाद लेना चाहते हैं। ::: तो ‘चिड़ पिड़ चूँ चूँ’ आपके लिए एक अनिवार्य हिंदी व्यंग्य पुस्तक है—जो आपको मुस्कुराने के साथ-साथ सोचने के लिए भी विवश करेगी।

Weight 150 g
Dimensions 12 × 02 × 19 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “चिड़ पिड़ चूँ चूँ”

Your email address will not be published. Required fields are marked *