पुस्तक का नाम – मेरे गीत मन के मीत
लेखिका – शिब्बी ममगाँई
श्रेणी – हिंदी काव्य-भक्ति साहित्य, समकालीन कविता
‘मेरे गीत मन के मीत’ केवल एक काव्य-संग्रह नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मध्य संवाद की एक अविरल धारा है। यह पुस्तक प्रेम की पारलौकिकता और भक्ति की अखंड साधना का ऐसा स्वर प्रस्तुत करती है, जो छन्द और शिल्प की सीमाओं से परे जाकर सीधे हृदय को स्पर्श करता है। जब आधुनिक जीवन की भौतिक चकाचौंध मनुष्य को उसकी आध्यात्मिक जड़ों से काट रही है, तब शिब्बी ममगाँई की कविताएँ हमें पुनः उस ‘अव्यक्त’ की ओर मोड़ती हैं, जिसे हम ईश्वर कहते हैं। इस संग्रह के गीत कभी भोलेनाथ की आराधना बनते हैं, कभी समाज की पीड़ा का सजीव चित्र, और कभी नारी-हृदय की मौन लेकिन दृढ़ पुकार। यह काव्यकृति प्रेम, भक्ति, वेदना, नारी चेतना और समकालीन यथार्थ का सुंदर समन्वय है। इसकी भाषा सरल, आत्मीय और लोकबोध से संपृक्त है, जो आम पाठक को भी आध्यात्मिक ऊँचाई का अनुभव कराती है।
‘मेरे गीत मन के मीत’- जहाँ कविता आरती बन जाती है, और शब्द साधना।
मुख्य विशेषताएँ- भक्ति, प्रेम और आत्म-साधना से ओतप्रोत गीत, नारी चेतना और सामाजिक यथार्थ का संवेदनशील चित्रण, सरल, भावप्रवण एवं हृदयग्राही भाषा, भजन, कविता और आत्मकथात्मक भावों का सुंदर संगम, आधुनिक स्त्री की दृष्टि से प्रस्तुत आध्यात्मिक काव्य, ::- किसके लिए उपयुक्त- हिंदी कविता एवं भक्ति साहित्य के पाठक, आध्यात्मिक एवं आत्मचिंतन में रुचि रखने वाले पाठक, नारी विमर्श एवं समकालीन संवेदनाओं के अध्येता, पुस्तकालयों, शिक्षण संस्थानों एवं साहित्य प्रेमियों के लिए संग्रहणीय कृति, :: – पुस्तक से क्या पाएँगे? आत्मा को स्पर्श करने वाली भक्ति-कविताएँ, प्रेम का निष्काम, निष्कलुष स्वरूप, समाज और स्त्री जीवन की सच्ची अनुभूतियाँ, शिल्प से परे जाकर भाव की शक्ति, :: – प्रकाशकीय टिप्पणी- “यह कविता उपासना है ::- छन्द से परे शब्दों से की गई पूजा।”– पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’, (प्रधान सम्पादक व प्रकाशक)








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