डॉ. अशोक राय ‘अज्ञान’ द्वारा लिखित ‘दूरियां दिल की’ पुस्तक एक हास्य-व्यंग आधारित कविता संग्रह की पुस्तक है। इसका प्रकाशन वाराणसी के ख्यात ‘स्याही प्रकाशन’ से हुआ है। डॉ. अशोक राय ‘अज्ञान’ देश में काफी समय से हास्य व्यंग के कवि के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं इसलिए पाठकों की चाहत के अनुरुप यह संग्रह उनकी हास्य-व्यंग्य आधारित काव्य रचनाओं का गुलदस्ता है। हास्य-व्यंग के नवांकुर कवियों को भी इसे जरूर पढ़ना चाहिए। हालांकि हास्य और व्यंग्य विधा में लिखते समय डॉक्टर अशोक राय ने इतना जरूर ध्यान दिया है कि भावनाओं की अभिव्यक्ति के चरम सुगमता के प्रत्येक मानदंड अवश्य पूरे हैं। जिससे भाषा की रोचकता बनी रहे। कुल मिलाकर यह किताब हंसी और व्यंगात्मक चित्रों को समेटे हुए हंसीकारी की किताब है। काव्य की इस पुस्तक का सम्पादन विख्यात सम्पादक, प्रकाशक व साहित्यकार पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने किया है। कुण्ठित जी ने इसमें प्रकाशकीय भी लिखा है। पुस्तक के लेखक प्रोफेसर अशोक कुमार राय ‘स्वामी सहजानंद पीजी कॉलेज’ कछवां मिर्जापुर के प्राचार्य एवं हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं। पढ़ते रहें, हंसते रहें… डॉ. अशोक राय ‘अज्ञान’ द्वारा लिखित ‘दूरियां दिल की’ पुस्तक एक हास्य-व्यंग आधारित कविता संग्रह की पुस्तक है। इसका प्रकाशन वाराणसी के ख्यात ‘स्याही प्रकाशन’ से हुआ है। डॉ. अशोक राय ‘अज्ञान’ देश में काफी समय से हास्य व्यंग के कवि के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं इसलिए पाठकों की चाहत के अनुरुप यह संग्रह उनकी हास्य-व्यंग्य आधारित काव्य रचनाओं का गुलदस्ता है। हास्य-व्यंग के नवांकुर कवियों को भी इसे जरूर पढ़ना चाहिए। हालांकि हास्य और व्यंग्य विधा में लिखते समय डॉक्टर अशोक राय ने इतना जरूर ध्यान दिया है कि भावनाओं की अभिव्यक्ति के चरम सुगमता के प्रत्येक मानदंड अवश्य पूरे हैं। जिससे भाषा की रोचकता बनी रहे। कुल मिलाकर यह किताब हंसी और व्यंगात्मक चित्रों को समेटे हुए हंसीकारी की किताब है। काव्य की इस पुस्तक का सम्पादन विख्यात सम्पादक, प्रकाशक व साहित्यकार पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने किया है। कुण्ठित जी ने इसमें प्रकाशकीय भी लिखा है। पुस्तक के लेखक प्रोफेसर अशोक कुमार राय ‘स्वामी सहजानंद पीजी कॉलेज’ कछवां मिर्जापुर के प्राचार्य एवं हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं। पढ़ते रहें, हंसते रहें…
दूरियां दिल की
Original price was: ₹250.00.₹235.00Current price is: ₹235.00.
+ Free Shippingइसका प्रकाशन वाराणसी के ख्यात ‘स्याही प्रकाशन’ से हुआ है। डॉ. अशोक राय ‘अज्ञान’ देश में काफी समय से हास्य व्यंग के कवि के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं इसलिए पाठकों की चाहत के अनुरुप यह संग्रह उनकी हास्य-व्यंग्य आधारित काव्य रचनाओं का गुलदस्ता है। हास्य-व्यंग के नवांकुर कवियों को भी इसे जरूर पढ़ना चाहिए। हालांकि हास्य और व्यंग्य विधा में लिखते समय डॉक्टर अशोक राय ने इतना जरूर ध्यान दिया है कि भावनाओं की अभिव्यक्ति के चरम सुगमता के प्रत्येक मानदंड अवश्य पूरे हैं। जिससे भाषा की रोचकता बनी रहे। कुल मिलाकर यह किताब हंसी और व्यंगात्मक चित्रों को समेटे हुए हंसीकारी की किताब है। काव्य की इस पुस्तक का सम्पादन विख्यात सम्पादक, प्रकाशक व साहित्यकार पण्डित छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ ने किया है। कुण्ठित जी ने इसमें प्रकाशकीय भी लिखा है। पुस्तक के लेखक प्रोफेसर अशोक कुमार राय ‘स्वामी सहजानंद पीजी कॉलेज’ कछवां मिर्जापुर के प्राचार्य एवं हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं। पढ़ते रहें, हंसते रहें…





Reviews
There are no reviews yet.