कवि व नाटककार डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ द्वारा लिखित व स्याही प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह नाटक कृति ‘मार्गदर्शक’ हिंदी साहित्य की एक अमूल्य निधि है। ये नाटक हिंदी नाटक साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। इसके प्रकाशक व प्रधान सम्पादक ख्यात साहित्यकार व पत्रकार पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ हैं। नाटक साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में विशिष्ट विधा होती है नाटक का अस्तित्व दुनिया भर के साहित्य में प्राचीन काल से मौजूद है। जो रचना श्रवण द्वारा ही नहीं अपितु दृष्टि द्वारा भी दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है उसे नाटक या दृश्य काव्य कहते हैं। इस ‘मार्गदर्शक’ कृति की विषयवस्तु विविध है। इसमें ऐतिहासिक, पौराणिक, सामाजिक, और राजनीतिक नाटक के अपेक्षित परिवेश शामिल हैं। इनके नाटक में डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ जी ने अपने किशोरावस्था के समय के सामाजिक सोच को शब्द के चित्र में बांधने की पूरी कोशिश की है। डा. ‘बहुमुखी’ का यह नाटक अपनी कलात्मकता और शिल्प कौशल के लिए भी आगामी समय में प्रसिद्ध होगा। इन्होंने हिंदी नाटक को आमजन भाषा से दूर करने की भाषा की नाटकीय कोशिश नहीं की है। इनके नाटक ‘मार्गदर्शक’ में सहज अभिनय की अपापर संभावनाएं हैं। डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ की हिंदी नाटक की यह कृति साहित्य के अध्ययन के लिए एक आवश्यक पुस्तक बन पड़ी है। यह पुस्तक हिंदी नाटक के विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह नाटक भारत के तत्कालीन सामाजिक कुरूपताओं को उजागर करता है। यह लोककथा पर आधारित नाटक है जो दो युगलों के बीच एक रोमांचक कहानी को प्रस्तुत करता है। ‘डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ जी की यह ‘मार्गदर्शक’ एक उत्कृष्ट पुस्तक है जो हिंदी नाटक साहित्य के प्रेमियों के लिए एक उत्कृठ पाठ्य सामग्री है।
मार्गदर्शक (Marg Darshak)
Original price was: ₹320.00.₹280.00Current price is: ₹280.00.
+ Free Shippingकवि व नाटककार डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ द्वारा लिखित व स्याही प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह नाटक कृति ‘मार्गदर्शक’ हिंदी साहित्य की एक अमूल्य निधि है। ये नाटक हिंदी नाटक साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। इसके प्रकाशक व प्रधान सम्पादक ख्यात साहित्यकार व पत्रकार पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुण्ठित’ हैं। नाटक साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में विशिष्ट विधा होती है नाटक का अस्तित्व दुनिया भर के साहित्य में प्राचीन काल से मौजूद है। जो रचना श्रवण द्वारा ही नहीं अपितु दृष्टि द्वारा भी दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है उसे नाटक या दृश्य काव्य कहते हैं। इस ‘मार्गदर्शक’ कृति की विषयवस्तु विविध है। इसमें ऐतिहासिक, पौराणिक, सामाजिक, और राजनीतिक नाटक के अपेक्षित परिवेश शामिल हैं। इनके नाटक में डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ जी ने अपने किशोरावस्था के समय के सामाजिक सोच को शब्द के चित्र में बांधने की पूरी कोशिश की है। डा. ‘बहुमुखी’ का यह नाटक अपनी कलात्मकता और शिल्प कौशल के लिए भी आगामी समय में प्रसिद्ध होगा। इन्होंने हिंदी नाटक को आमजन भाषा से दूर करने की भाषा की नाटकीय कोशिश नहीं की है। इनके नाटक ‘मार्गदर्शक’ में सहज अभिनय की अपापर संभावनाएं हैं। डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ की हिंदी नाटक की यह कृति साहित्य के अध्ययन के लिए एक आवश्यक पुस्तक बन पड़ी है। यह पुस्तक हिंदी नाटक के विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह नाटक भारत के तत्कालीन सामाजिक कुरूपताओं को उजागर करता है। यह लोककथा पर आधारित नाटक है जो दो युगलों के बीच एक रोमांचक कहानी को प्रस्तुत करता है। ‘डा. अनिल सिन्हा ‘बहुमुखी’ जी की यह ‘मार्गदर्शक’ एक उत्कृष्ट पुस्तक है जो हिंदी नाटक साहित्य के प्रेमियों के लिए एक उत्कृठ पाठ्य सामग्री है।








Reviews
There are no reviews yet.