पुस्तक का नाम: ‘माँ सरस्वती चालीसा’
विधा: काव्य-छन्द
प्रकाशन: स्याही प्रकाशन
प्रकाशक व सम्पादक: पं0 छतिश द्विवेदी ‘कुंठित’
भाषा: हिन्दी संस्करण: 2023
पुस्तक विवरण –
भारत धर्म प्रवृत्ति के देशों में सबसे ऊपर गिना जाता है। यहाँ हर धर्म का सम्मान ब आदर किया जाता है। हर धर्म से जुड़े देवी-देवताओं के लिए धर्म ग्रंथ व स्तुतियां भी बहुतायत लिखी जाती रही हैं। वैसे ही माँ सरस्वती देवी के लिए भी कई चालीसा लिखे गए होंगे। लेकिन चन्दौली के साहित्यकार व कवि राजेंद्र प्रसाद गुप्त ‘बावरा’ द्वारा लिखित यह ‘माँ सरस्वती चालीसा’ सभी चालीसा से अलग व भिन्न है। इसमें अवधी, भोजपुरी वह ठेठ का सम्मिलीकरण है, और यह खड़ी हिंदी के साथ आगे बढ़ता है। इसमें मिश्रित भाषा में लिखा गया मोहक, चुटिला, भावपूर्ण ,धर्म की परंपरा व मानदंडों को अपने शब्द बिंबो में लेकर आगे बढ़ता हुआ भक्ति गीतों का सुंदर शब्दांकन किया गया है।
अनेक चालीसा को पढ़ने के बाद इसको पढ़ने वाले लोग तथा भक्ति काव्य के जानकार लोगों ने यह बताया कि माँ सरस्वती का यह चालीसा बेहद भावपूर्ण व गायन के योग्य है। इसे मंदिरों, धर्मस्थानों में काफी सम्मान मिल रहा है, अनेक चालीसा की तरह यह चालीसा भी लोगों को उनकी भक्ति और कामनाओं को ईश्वर तक पहुंचाने में मदद करेेगा। यह लोगों की प्रार्थनाओं के काफी उपयुक्त है। आगे समय में इसकी मान्यता और बढ़ेगी। क्योंकि यह वर्तमान में ही अनेक मंदिरों, धर्म स्थानों पर लोगों की प्रार्थनाओं में प्रयोग में आने लगा है। यह चालीसा हिन्दी भाषा में अनुपम धार्मिक गीतों की एक श्रेष्ठ छन्द कृति है।






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